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Naitik Mulya Par Aadharit Kahani (नैतिक मुल्यों पर कहानी)

Naitik Mulya Par Aadharit Kahani (नैतिक मुल्यों पर आधारित कहानी) 

नमस्कार दोस्तों, मैं साकेश , स्वागत करता हुँ आपका एक और नये कहानी में। दोस्तों, आज का यह कहानी बहुत छोटा है लेकिन यह Naitik Mulya Par Aadharit Kahani (नैतिक मुल्यों पर आधारित कहानी) है। इसलिये आप इस कहानी को शुरु से लेकर अंत तक पुरा पढ़े। अगर आप अगले 2-3 मिनट का समय देकर इस कहानी को शुरु से लेकर अंत तक पढ़ते है तो मैं जिम्मेदारी लेता हुँ कि आपके समय क सही उपयोग होगा। इसलिए इस कहानी को शुरु के अंत तक पुरा पढ़े।


चुहिया की बेटी का विवाह


                    क चुहिया को एक सुंदर कन्या थी। वह अपनी बेटी का विवाह सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से करना चाहती थी। बहुत सोच-विचार करने पर उसे लगा कि भगवान सूर्य उसकी कन्या के लिए उपयुक्त वर साबित होंगे।


                   चुहिया सूर्य भगवान के पास गई। उसने कहा, "सूर्य देवता, क्या आप मेरी सुंदर कन्या से विवाह करेगें? क्या उसे आप अपनी पत्नी के रूप में पसंद करेगें?"

सूर्य भगवान ने कहा,चुहिया चाची, आपने मुझे अपनी बेटी के योग्य वर समझा, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ। पर मैं सबसे ज्यादा शक्तिशाली नहीं हूँ। मुझसे शक्तिशाली तो वरूण देवता हैं। वे अपने बादलों से मुझे ढक देते हैं।"


Naitik Mulya Par Aadharit Kahani (नैतिक मुल्यों पर आधारित कहानी) - Excited Indian
Naitik Mulya Par Aadharit Kahani (नैतिक मुल्यों पर आधारित कहानी) 


                   अतः चुहिया जल के देवता के पास गई और बोली,"वरूण देवता, क्या आप मेरी सुंदर कन्या से विवाह करेंगे? क्या उसे आप अपनी पत्नी के रूप में अपनाएँगे?"


वरूण देवता ने जवाब दिया, देखो देवी, आपने मुझे अपनी बेटी के योग्य वर समझा, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ। पर मैं सबसे ज्यादा शक्तिशाली नहीं हूँ। मुझसे अधिक शक्तिशाली तो वायु देवता हैं। वे मेरे बादलों को दूर-दूर तक उड़ा ले जाते हैं।"


                    इसलिए चुहिया चाची वायु देवता के पास गई और कहने लगी, "वायु देवता, क्या आप मेरी सुन्दर कन्या से विवाह करेंगे? क्या आप मेरी बेटी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे?" वायु देवता ने कहा, "चाची आपने मुझे अपनी बेटी के योग्य वर समझा, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ। पर मैं सबसे ज्यादा शक्तिशाली नहीं हूँ। मुझसे अधिक शक्तिशाली तो पर्वतराज हैं। वे मेरे मार्ग में खड़े हो जाते हैं और मुझे रोक देते हैं। मैं चाहे कितनी ही ताकत लगाऊँ पर पर्वतराज को अपने रास्ते से नहीं हटा पाता। 


                   तब चुहिया चाची पर्वतराज के पास गई उनसे बोली, पर्वतराज, "क्या आप मेरी सुन्दर कन्या से विवाह करेंगे? क्या आप मेरी बेटी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे?" पर्वतराज ने कहा, "चाची, आपने मुझे अपनी बेटी के योग्य वर समझा, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ। पर मैं सबसे अधिक शक्तिशाली नहीं हूँ। मुझसे ज्यादा शक्तिशाली तो जो मूषकराज (चूहों के राजा) हैं। वे और उनके साथी मेरे चट्टानी शरीर में बड़े-बड़े बिल खोदकर मुझे खोखला कर ड़ालते हैं।


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                   अंत में चुहिया चाची मूषकराज के पास गई और बोली, "मूषकराज, क्या आप मेरी सुन्दर बेटी से विवाह करेंगे? क्या आप उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे?"


मूषकराज यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा,"हाँ, मैं आपकी बेटी से अवश्य विवाह करूँगा।


तब गाजे-बाजे के साथ धूमधाम से चुहिया की बेटी और मूषकराज का विवाह संपन्न हुआ।"


  • शिक्षा -दूर के ढ़ोल सुहावने लगते हैं।

सबसे पहले तो मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हुँ कि आपने इस कहानी को शुरु से लेकर अंत तक पुरा पढ़ा। मैं पुरे उम्मीद के साथ ये कह सकता हुँ कि आपको इस कहानी से कुछ न कुछ नया सिखने जरुर मिला होगा। अगर आपको सच में ये Naitik Mulya Par Aadharit Kahani (नैतिक मुल्यों पर आधारित कहानी) पसंद आया है तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें।


मैं आपको नीचे कुछ और जानकारी वाला कहानी दे रहा हुँ आप इसे शुरु से अंत तक पुरा जरुर पढ़े।


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